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WRITER RAHUL MISHRA
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हिन्दी साहित्यकार उ०प्र०
दिसंबर 21, 2024
सन्नाटा
बहुत गहन सन्नाट है
आकाश पर टिमटिमाते तारे हैं
चांद की चटक रोशनी है
और वीरानापन है रीतपन है
नदी में शांत जल की धारा है
पेड़ों का झुरमुट है
दूर कहीं खेतों से आती तेज गुहार है
आग की चिंगारियां और तपश है
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