सन्नाटा

बहुत गहन सन्नाट है
 आकाश पर टिमटिमाते तारे हैं
 चांद की चटक रोशनी है
 और वीरानापन है रीतपन है 
नदी में शांत जल की धारा है 
पेड़ों का झुरमुट है
  दूर कहीं खेतों से आती तेज गुहार है 
आग की चिंगारियां और तपश है 

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