क्या यही सत्यमेव जयते हैं

देश में भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं हो सकता शराब सरकार और फिर शोषण अन्याय का बोलबाला न्याय की गुहार  

                 क्या यही सत्यमेव जयते है 

मौन से मुखर
हिन्दी साहित्यकार उ०प्र० 

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट