मृत्यु जीवन का परिवर्तन है

किसने कहा में कर्जदार नहीं में तो इस शरीर का भी कर्जदार हूं और संसार का द्वितीय अदा करना पड़ेगा किसी छण इस शरीर को पांच तत्वों में परिपूर्ण  



हिन्दी साहित्यकार उ०प्र० 

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