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जन्म का प्रथम संदेश मृत्यु है
मनुष्य मृत्यु के विपरीत होता है मगर मृत्यु दोषी नहीं है क्योंकि परिवर्तन संसार में निरंतर है तो हम भी इसी परिवर्तन संसार में है तो हमारे साथ भी परिवर्तन होगा और मृत्यु भी इस पंचतत्व शरीर का परिवर्तन है
राहुल मिश्रा हिन्दी साहित्यकार उ०प्र०
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